किस दिशा में जा रही है राउरकेला की राजनीति
राउरकेला में जबसे हैजा रोग के मामले सामने आए है तबसे प्रमुख विपक्षी पार्टीयाँ दूषित पानी और मरीजों को मुद्दा बनाकर बिरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखे हुए है।
जबकि शहर व आसपास के क्षेत्रों में अवैध बन्दूकें आग उगल रही है,अवैध शराब के मामले, ड्रग्स ब्राउन सुगर जैसे घातक मादक पदार्थो के मामले आबकारी बिभाग द्वारा कडी़ कार्यवाही किए जाने के बावजूद आए दिन सामने आ रही है।
भूमि माफियाओ द्वारा गैर की भूमि, सरकारी भूमी, जंगल जमीन पर राजस्व अधिकारी की मिली भगत से अवैध कब्जा करने के मामले, आए दिन सामने आ रहे हैं।
जिले में इस्पात कारखाना, डेम, रेलवे, खादान के विकास कार्य में विस्थापित मूलवासीयो के हक का मुद्दा, जिसके लिए विस्थापित मूल वासी आए दिन हड़ताले कर रहे है। मोबाइल फोन कंपनी द्वारा सारा देश ठगा गया।मोबाइल फोन कंपनियों ने आजीवन सेवा देने का वादा कर मुफ्त में सीम बांटी और जब लोग मोबाइल के आदी हो गए मोबाइल कंपनियों ने अपने ग्राहकों को भारी भरकम रिजार्च कराने पर मजबूर किया।
विद्यालय की इमारते, मेज कुर्सियाँ, मध्यान भोजन , खेल मैदान, सब सुंदर और मजबूत हुए लेकिन पढाई का स्तर नीचे गिरता गया।
राउरकेला के मेनरोड़ में पार्किग व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। मेनरोड़ में दुकानों, शौपिंग मालों के साथ साथ ग्राहकों और वाहनों की संख्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
क्या उल्लिखित समस्याओं का हल करना, सामाधान ढूंढना, उन्हें मुद्दा बनाना समाज के ठेकेदारो ,जनप्रतिनिधीयो,की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। क्या एक दूसरे पर दोषारोपण कर किसी को नीचा दिखाना ही राजनीती है।
राउरकेला एक ऐसा शहर है जहाँ और शहर की तुलना में सबसे अधिक रक्तदाता है, जगह जगह शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने वाले समाजसेवक है, ठण्ड में जरूरतमंदो को कम्बल देनेवाले दानवीर है, सड़क के गड्ढो़ को भरने वाले, नालीयाँ साफ करने वाले कर्मवीर है। उस शहर में एक छोटी सी बिमारी जिसकी सेवा के लिए चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों की पूरी टीम रात दिन सेवा में लगी है, उसे मुद्दा बनाना कहाँ तक उचित है।
पर आज की तारीख में राउरकेला की राजनीति का पन्ना उलटते ही सबसे पहले पन्ने पर हैजा और राउरकेला नगर निगम का कार्यालय ही नजर आ रहा है।
जबकि हकीकत यह है कि बदलते मौसम, बदलते जीवन शैली, गलत खानपान, की वजह से मानव शरीर में बीमारियों, संक्रमण आदी का होना तय है। अभी हाल ही में कोरोना महामारी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, इस महामारी ने पूरे विश्व में अनगिनत मरीज और मौते दी लेकिन पूरा विश्व इसे मुद्दा बनाने के वजाए इस महामारी में एक दूसरे का साथ दिया। पर लगता है इतनी बड़ी आपदा से राजनेताओं ने कोई सीख नहीं ली। मरीजों का दुःख बाटने उनका साथ होने के वजाए उनकी बिमारी का मुद्दा बनाना कहाँ तक उचित है। अब राउरकेला की जनता के लिए इस बात की चिंता करना आवश्यक हो गया है कि हमारे राजनेता हमारे शहर का भविष्य किस ओर ले जा रहे है।





